प्रतापनगर की सड़क या सज़ा? डोबरा चांटी पुल के आगे कुछ किलो मीटर का सफर बना लोगों के लिए दर्द का रास्ता,।।
नमस्कार दोस्तों,
एक तरफ विकास के बड़े-बड़े दावे… चमचमाती डबल लेन सड़कें… और दूसरी तरफ हकीकत ऐसी कि लोगों का सफर ही सज़ा बन जाए।
चंबा के नजदीक बाग बाटा से लेकर डोबरा चांटी ब्रिज तक डबल लेन सड़क बन रही है। देखकर लगता है कि अब प्रतापनगर भी विकास की राह पर चल पड़ा है। लेकिन जैसे ही डोबरा चांटी पुल पार करते हैं, कहानी अचानक बदल जाती है।
पुल शुरू होते ही करीब 2 से 3 किलोमीटर तक सड़क इतनी खराब है कि गाड़ी चलाना तो दूर, बैठना भी मुश्किल हो जाता है। बड़े-बड़े गड्ढे, टूटी डामर, धूल और उछाल… ऐसा लगता है जैसे सड़क नहीं, पत्थरों का रास्ता हो।
स्थानीय लोग कहते हैं –
“हम टैक्स भी देते हैं, वोट भी देते हैं… फिर भी ये हाल क्यों?”

बीमार व्यक्ति हो, बुजुर्ग हो या गर्भवती महिला… इस सड़क से गुजरना किसी खतरे से कम नहीं। कई बार तो ऐसा लगता है कि गाड़ी नहीं, शरीर टूट रहा हो।
सबसे दुखद बात ये है कि ये कोई नई समस्या नहीं है। सालों से लोग इसी रास्ते से परेशान हैं। शिकायतें भी हुईं, वादे भी हुए, लेकिन काम आज तक अधूरा है।
प्रतापनगर एक दूरस्थ क्षेत्र जरूर है, लेकिन यहां के लोग भी इंसान हैं, उन्हें भी अच्छी सड़क का अधिकार है।
हर चुनाव में नेता आते हैं, हाथ जोड़ते हैं, बड़े-बड़े सपने दिखाते हैं…
लेकिन चुनाव खत्म होते ही ये सड़कें और ये लोग दोनों भुला दिए जाते हैं।
आज सवाल सिर्फ सड़क का नहीं है…
सवाल है भरोसे का,।
सवाल है उस विकास का, जो कागज़ों में तो दिखता है, जमीन पर नहीं।
अब वक्त आ गया है कि जिम्मेदार लोग जागें और इस सड़क का जल्द डामरीकरण करें, ताकि प्रतापनगर की जनता को राहत मिल सके।
क्योंकि विकास तभी सही है…
जब आखिरी गांव तक पहुंचे।

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